एलुमिनियम ऑक्साइड के गुण उपयोग और अन्य जानकारी Aluminum Oxide in Hindi

एल्युमिनियमऑक्साइड के गुण उपयोग और अन्य जानकारी Aluminum Oxide in Hindi

एल्युमिनियम ऑक्साइड क्या होता है (What is Aluminum Oxide in Hindi)

एल्युमिनियम ऑक्साइड एक रासायनिक यौगिक है, जो एल्युमिनियमऔर ऑक्सीजन से मिलकर बना होता है। इसका रासायनिक सूत्र Al2O3 है। इसके एक अणु में एल्युमिनियम के दो परमाणु और ऑक्सीजन के तीन परमाणु होते है। आम बोलचाल में इसे एल्युमिना कहा जाता है, तथा विशेष उपयोगो के आधार पर इसे एलोक्साइड , एलोक्साइट या अलंडम भी कहा जाता है। प्राकृतिक रूप से एल्युमिनियम ऑक्साइड कोरन्डम, रूबी, नीलम और पन्ना के रूप में पाया जाता है। यह एक उभयधर्मी पदार्थ है, जो अम्ल और क्षार दोनों के साथ प्रतिक्रिया करता है। यह ठोस के रूप में होता है और आमतौर पर सफेद रंग का दिखाई देता है।

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एल्युमिनियम ऑक्साइड के गुण (Properties of Aluminum oxide in Hindi)

  • एल्युमिनियम ऑक्साइड एक सफ़ेद रंग का क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ होता है।
  • यह एक गंधरहित पदार्थ होता है।
  • इसका घनत्व 3.95 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर होता है।
  • सामान्य तापमान पर एल्युमिनियम ऑक्साइड ठोस अवस्था में पाया जाता है, इसका गलनांक (Melting Point) 2072 डिग्री सेल्सियस और इसका क्वथनांक (Boiling Point) 2977 डिग्री सेल्सियस होता है।
  • यह जल में अघुलनशील होता है।
  • यह विधुत प्रवाहित नहीं करता, अर्ताथ यह एक विधुत इंसुलेटर होता है।
  • एल्युमिनियम ऑक्साइड को तैयार करने की अलग-अलग विधियों के अनुसार इसके भौतिक और रासायनिक गुण भिन्न-भिन्न हो सकते है, जैसे बहुत अधिक तापमान पर बनाया जाने वाला एल्युमिनियम ऑक्साइड रासायनिक रूप से निष्क्रिय होता है।
  • यह सोडियम हाइड्रोऑक्साइड से प्रतिक्रिया करके सोडियम एल्युमिनेट और जल बनाता है, यह प्रतिक्रिया 900 से 1100 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर संपन्न होती है।
  • एल्युमिनियम ऑक्साइड एक अत्यंत कठोर पदार्थ होता है, मोहस स्केल (Mohs Scale) पर इसकी कठोरता 9 होती है। इससे अधिक कठोर प्राकृतिक सामग्री केवल मोइसनाइट और हिरा होते है, जिनकी कठोरता मोहस स्केल (Mohs Scale) पर क्रमशः 9.5 और 10 होती है।

 

एल्युमिनियम ऑक्साइड के उपयोग (Uses of Aluminum oxide)

  • अधिकांश एल्युमिनियम ऑक्साइड का उपयोग शुद्ध एल्युमिनियम धातु बनाने के लिए किया जाता है।
  • खुले वातावरण में शुद्ध एल्युमिनियम धातु पर ऑक्साइड की परत बन जाती है जिसे एल्युमिनियम ऑक्साइड कहते है, यह परत एल्युमिनियम पर एक सुरक्षात्मक परत बनती है, जो एल्युमिनियम को और अधिक ऑक्सीकृत होने से बचाती है तथा वातावरण से सुरक्षा प्रदान करती है।
  • उच्च कठोरता और उच्च गलनांक के कारण इसका उपयोग अपघर्षक (Abrasive) के रूप मे किया जाता है ।
  • एल्युमिनियम ऑक्साइड शरीर के भीतर एक निष्क्रिय सामग्री है, तथा यह एक मजबूत और अत्यधिक कठोर सामग्री है इसलिए चिकित्सा उद्योग मे इसका उपयोग हिप रिप्लेसमेंट में बियरिंग्स के लिए किया जाता है।
  • इसका उपयोग उत्प्रेरक के रूप में भी किया जाता है।
  • एल्युमिनियमऑक्साइड एक हलकी, मजबूत और कठोर सामग्री है, इसलिए इसका उपयोग बुलेट प्रूफ आर्मर तथा सैन्य गाड़ियों और हवाईजहाजों  कवच बनाने के लिए किया जाता है।
  • यह एक विधुत इंसुलेटर होता है, तथा इसका उच्च गलनांक होता है, इसलिए  उपयोग इंसुलेटर के रूप में स्पार्क प्लग और माइक्रोचिप उद्योग में किया जाता है।
  • माणिक, पन्ना और नीलम जैसे कीमती रत्न एल्युमिनियम ऑक्साइड का ही क्रिस्टलीय स्वरूप होते है, जिसे कोरंडम कहा जाता है, इनका उपयोग गहने बनाने के लिए किया जाता है।
  • एल्युमिनियम ऑक्साइड सनस्क्रीन में आम सामग्री में से एक है, इसके अलावा इसका उपयोग  नेल पॉलिश, ब्लश और लिपस्टिक जैसे सौंदर्य प्रसाधन बनाने में भी किया जाता है।
  •  इसका उपयोग ग्लास बनाने के लिए किया जाता है, एल्युमिनोसिलिकेट ग्लास आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला ग्लास होता है जिसमें लगभग 5% से 10% एल्यूमिना होता है।
  • गैस धाराओ से पानी को अलग करने के लिए एल्युमिनियम आक्साइड का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है ।

 

एल्युमिनियम आक्साइड का उत्पादन (Production of Aluminum Oxide)

एल्युमिनियम ऑक्साइड अक्सर बायर प्रक्रिया द्वारा निर्मित होता है, जिसका अर्थ है एल्यूमिना का उत्पादन करने के लिए बॉक्साइट को परिष्कृत करना। यह प्रक्रिया कुचले और धुले हुए बॉक्साइट को सुखाने से शुरू होती है, जिसमें आमतौर पर 30-55% एल्युमिनियम ऑक्साइड होता है। बॉक्साइट को कास्टिक सोडा में घोलकर घोल बनाया जाता है, जिसे लगभग 230-520 °F (110-270 °C) के तापमान पर गर्म किया जाता है। फिर इस मिश्रण को “लाल मिट्टी” अशुद्धियों नामक अवशेषों को हटाने के लिए फ़िल्टर किया जाता है।   फ़िल्टर किए गए एल्यूमिना समाधान (एल्यूमीनियम हाइड्रॉक्साइड) को तब प्रीसिपिटेटर टैंक में स्थानांतरित या पंप किया जाता है जहां यह ठंडा हो जाता है और बीज बनना शुरू हो जाता है। ये बीज ठोस एल्यूमीनियम हाइड्रॉक्साइड क्रिस्टल बनने की अनुमति देने वाली वर्षा प्रक्रिया को उत्तेजित करते हैं। टैंक के तल पर बसने वाले सभी एल्यूमीनियम हाइड्रॉक्साइड को हटा दिया जाता है।  बचे हुए कास्टिक सोडा को एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड से धोया जाता है, जो विभिन्न स्तरों पर छानने से गुजरता है। अंत में, अतिरिक्त पानी को पूरी तरह से निकालने के लिए इसे गरम किया जाता है। शीतलन अवस्था से गुजरने के बाद, महीन सफेद पाउडर का उत्पादन होता है, जो एल्युमिनियम आक्साइड का शुद्ध स्वरूप होता है ।

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