एसिटिलीन गैस के गुण उपयोग और जानकारी Acetylene Gas in Hindi

एसिटिलीन गैस के गुण उपयोग और जानकारी Acetylene Gas in Hindi

 

एसिटिलीन क्या है (What is Acetylene)

एसिटिलीन एक रासायनिक यौगिक है जिसका रासायनिक सूत्र C₂H₂ है। इसके एक अणु में कार्बन के दो परमाणु, और हाइड्रोजन के दो परमाणु होते है। यह एक हाइड्रोकार्बन और सबसे सरल एल्काइन है। इस रंगहीन गैस का व्यापक रूप से ईंधन और रासायनिक निर्माण खंड के रूप में उपयोग किया जाता है। यह गैस अपने शुद्ध रूप में 15 PSI के दबाव पर अत्यंत अस्थिर होती है, इसलिए इसे आमतौर पर विशेष साधनों द्वारा संभाला जाता है। एसिटिलीन गैस को सबसे गर्म और सबसे कुशल ईंधन गैस के रूप में जाना जाता है। एसिटिलीन एकमात्र ईंधन गैस है जिसे भूमिगत स्थिति में काम करने की स्थिति के लिए अनुशंसित किया जाता है, क्योंकि यह हवा से हलकी होती है, इसलिए लीकेज होने की स्थिति में यह एक जगह एकत्रित नहीं होती, जिससे गंभीर विस्फोट होने का खतरा नहीं रहता।

acetylene-gas-in-hindi, एसिटिलीन-गैस-क्या-है, एसिटिलीन-गैस-के-गुण, एसिटिलीन-गैस-के-उपयोग,

एसिटिलीन के गुण (Properties of Acetylene in Hindi)

  • एसिटिलीन एक रंगहीन, गंधहीन और अत्यंत ज्वलनशील गैस है। व्यावसायिक ग्रेड एसिटिलीन में ईथर जैसी या लहसुन जैसी गंध हो सकती है।
  • इसका घनत्व 1.1 किलोग्राम प्रति घन मीटर होता है।  
  •  इसका गलनांक (Melting Point) -82.22 डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर यह गैस ठोस अवस्था से तरल अवस्था में परिवर्तित हो जाती है। -82.22 डिग्री सेल्सियस से कम के तापमान पर यह गैस ठोस अवस्था में पायी जाती है।
  • इसका क्वथनांक (Boiling Point) -75 डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर यह गैस तरल अवस्था से गैस अवस्था में परिवर्तित हो जाती है।
  • एसिटिलीन गैस 15 PSI से अधिक के दबाव पर अत्यंत अस्थिर होती है, इस दबाव पर यह गैस विघटित होकर अपने मूल तत्व हाइड्रोजन और कार्बन में टूटने लगती है, इस प्रतिक्रिया के दौरान बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न होती है, जिससे यह गैस हवा या ऑक्सीजन की उपस्थिति के बिना भी प्रभावी ढंग से प्रज्वलित हो सकती है, जिससे भयानक विस्फोट हो सकता है।
  • एसिटिलीन विस्फोटक एसिटाइलाइड यौगिक बनाने के लिए सक्रिय धातुओं (जैसे, तांबा, चांदी और पारा) के साथ प्रतिक्रिया करता है।
  • एसिटिलीन पीली कालिख की लौ के साथ हवा में जलती है और कार्बन मोनोऑक्साइड भी पैदा करती है। अगर एसिटिलीन को ऑक्सीजन की अधिकता के साथ जलाया जाता है, तो यह बहुत गर्म नीली लौ के साथ जलता है, जिसका तापमान लगभग 3000 डिग्री सेल्सियस होता है।

 

एसिटिलीन के उपयोग (Uses of Acetylene in Hindi)

  • एसिटिलीन का सबसे आम उपयोग विभिन्न कार्बनिक रसायनों के उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में होता है, जिसका व्यापक रूप से पॉलीयुरेथेन और पॉलिएस्टर प्लास्टिक की तैयारी में उपयोग किया जाता है।
  • एसिटिलीन में  नमी कम होती है इसलिए यह ईंधन गैस कई महत्वपूर्ण हीटिंग प्रक्रियाओं के लिए एक अच्छा विकल्प है, जैसे फ्लेम हीटिंग, फ्लेम गॉजिंग, वेल्डिंग, फ्लेम हार्डनिंग, फ्लेम क्लीनिंग, फ्लेम स्ट्रेटनिंग, थर्मल स्प्रेइंग, स्पॉट-हीटिंग, ब्रेजिंग, टेक्सचरिंग, प्रोफाइल-कटिंग, ब्रांडिंग वुडन पैलेट्स, वुड-एजिंग और कार्बन कोटिंग आदि।
  • कुछ व्यावसायिक रूप से उपयोगी एसिटिलीन यौगिकों में एसिटिलीन ब्लैक शामिल है, जिसका उपयोग कुछ ड्राई-सेल बैटरी में किया जाता है, और एसिटिलेनिक अल्कोहल, जो विटामिन के संश्लेषण में उपयोग किया जाता है।
  • इतिहास के प्रारंभिक वर्षों में (लगभग 1890-1900) इसका उपयोग ट्रेनों और शहर की सड़कों के लिए एक रोशनी के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता था।

 

अन्य जानकारी (Other Information)

  • एसिटिलीन का व्यावसायिक उत्पादन प्राकृतिक गैस से थर्मल क्रैकिंग प्रक्रिया द्वारा किया जाता है, इसके अलावा कैल्शियम कार्बाइड और पानी पर प्रतिक्रिया करके भी इसका व्यावसायिक उत्पादन किया जाता है।
  • एथिलीन उत्पादन के समय एसिटिलीन  को एक उप-उत्पाद के रूप प्राप्त किया जाता है।
  • एसिटिलीन एक अत्यंत ज्वलनशील और विस्फोटक गैस है, तथा यह उच्च दबाव के प्रति अत्यंत संवेदनशील होती है, उच्च दबाव पर यह गैस अपने मूल तत्वों में विघटित हो जाती है, इस प्रक्रिया मे बहुत अधिक गर्मी उत्पन्न होती है, जिससे विस्फोट हो सकता है । इसलिए एसिटिलीन गैस को विशेष रूप से डिजाइन किए गए कंटेनरों मे ही संग्रहीत किया जाता है।
  • 1900 की शुरुआत में एसिटिलीन का उपयोग रोशनी के स्रोत के रूप में किया गया था। एक प्रकार के एसिटिलीन लैंप में, कैल्शियम कार्बाइड के एक ठोस हिस्से पर नियंत्रित दर पर पानी गिरने दिया जाता था। तब उत्पादित एसिटिलीन एक प्रज्वलन कक्ष में पहुँचती थी, जहां पर इसे जलाने पर यह एक शानदार सफेद रोशनी के साथ जलती थी।
  • एसिटिलीन की खोज ब्रिटिश केमेस्ट्री प्रोफेसर एडमंड डेवी (Edmund Davy) ने 1836 में की थी।

  यह भी पढ़ें 

 

error: Content is protected !!