इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की जानकारी International Space Station in Hindi

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की विस्तृत जानकारी International Space Station in Hindi

 

अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन क्या है (What is International Space Station)

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जिसे संक्षेप में ISS भी कहा जाता है, एक मानव निर्मित शोध स्थल है, जिसे बाहरी अंतरिक्ष में पृथ्वी की निकटवर्ती कक्षा में स्थापित किया गया है। इसकी शुरुआत नवंबर 1998 में की गयी थी। वर्तमान में यह मानव द्वारा संचालित सबसे महँगी परियोजना है, जिस पर अभी तक 150 अरब डालर से अधिक का खर्च किया जा चुका है। यह स्पेस स्टेशन संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) की नासा (NASA), रूस की रॉस्कॉस्मॉस (Roscosmos), यूरोपियन स्पेस एजेंसी, जापान की ज़ेक्सा (Jexa) और कनाडा की कैनेडियन स्पेस एजेंसी (CSA) आदि का एक संयुक्त उपक्रम है।

 

अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पृथ्वी की कक्षा में में स्थापित एक बड़ा अंतरिक्ष यान है, जो अंतरिक्ष में स्थित एक घर की तरह कार्य करता है, यहां अंतरिक्ष यात्रियों का छोटा दल निवास करता है। यह स्पेस स्टेशन पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर की औसत ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करता है। अंतरिक्ष में स्थित यह स्पेस स्टेशन लगभग 28100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ़्तार से पृथ्वी की परिक्रमा करता है तथा प्रत्येक 90 मिनट में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी कर लेता है। इस प्रकार यह स्पेस स्टेशन प्रतिदिन लगभग 16 बार पृथ्वी की परिक्रमा करता है।

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इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का आकार (International Space Station Size)

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की कुल लम्बाई 310 फुट (94 मीटर) है, इसके प्रेशराइज़ केबिन की लम्बाई लगभग 218 फुट (67 मीटर) है, जिसका आयतन लगभग 916 घन मीटर है। इस स्पेस स्टेशन को 6 क्रू मेंबर के रहने लायक बनाया गया है। भीतर से इसका आकर किसी 5 बैडरूम वाले घर के बराबर या दो 747 जम्बोजेट विमानों के जितना है। इस स्पेस स्टेशन का कुल वजन लगभग 420 मीट्रिक टन के आसपास है। विधुत उत्पादन के लिए इस स्पेस स्टेशन में सोलर पैनल के आठ सेट लगाए गए है, जिनसे करीब 75 से 90 किलोवाट प्रति घंटा के आसपास विधुत उत्पादन होता है। इस स्पेस स्टेशन में बाहर की तरफ कई रोबोटिक आर्म या हाथ लगाए गए है, जिनका उपयोग अंतरिक्ष यात्री स्पेस स्टेशन के निर्माण और विस्तार के लिए करते है। 

 

अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन क्या काम करता है (What does the International Space Station do?)

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष में मानव के एक स्थाई निवास रूप में कार्य करता है इसके अलावा इसके कई और अन्य महत्वपूर्ण उपयोग भी है जिनमे से कुछ इस प्रकार है :-

 

  • अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन का सबसे प्रमुख कार्य वैज्ञानिक रिसर्च करना है। यहां पर शून्य गुरुतवाकर्षण के वातावरण में ऐसे प्रयोग किये जा सकते है, जिन्हे पृथ्वी कर करना संभव नहीं है। यहां पर रिसर्च करके जो तकनीक विकसित की जाती है उसका उपयोग भविष्य में पृथ्वी पर मानव जीवन और अन्य जीवो के कल्याण के लिए किया जाता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन का लगातार विस्तार किया जाता आ रहा है, इसे बनाने के लिए जो तकनीक विकसित की गयी है, भविष्य में उस तकनीक को और अधिक विकसित करके ऐसे अंतरिक्ष यान बनाए जा सकेंगे जो पृथ्वी की कक्षा से बहुत दूर मंगल ग्रह तक मानव को ले जाने में सक्षम होंगे।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में एस्ट्रोनॉट लम्बे समय तक शून्य गुरुतवाकर्षण में निवास करते है, इसलिए उस वातावरण में मानव शरीर पर रिसर्च करके यह पता लगाया जाता है की शून्य गुरुत्वाकर्षण और अंतरिक्ष के वातावरण में लम्बे समय तक रहने पर मानव शरीर पर क्या प्रभाव पड़ते है। यह जानकारी भविष्य में होने वाली सुदूर ग्रहों तक जाने वाली अंतरिक्ष यात्राओं में उपयोगी होगी। क्योकि पृथ्वी से अन्य ग्रहों को दुरी बहुत अधिक है जहाँ पहुंचने में बहुत अधिक समय लगता है, यदि मंगल ग्रह की ही बात करें तो पृथ्वी से मंगल ग्रह तक किसी अंतरिक्ष यान को भेजने में 250 से 300 दिन का समय लग सकता है। यदि किसी दूर स्थित गृह या सौरमंडल के बाहर किसी जगह तक अंतरिक्ष यान को भेजा जाये, तो उसे वहाँ तक पहुंचने में दशकों का समय लग सकता है। यदि इतने लम्बे समय तक किसी मानव को अंतरिक्ष यात्रा पर भेजना पड़े तो उसके लिए पर्याप्त रिसर्च करके आवश्यक तकनीक विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में पौधों और बीजों पर शून्य गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव को जानने के लिए रिसर्च की जाती है, इस जानकारी का उपयोग करके अंतरिक्ष में फसल उगाने की तकनीक विकसित करने के लिए प्रयास किये जा रहें है। ऐसी तकनीक भविष्य में लम्बी दुरी की अंतरिक्ष यात्राओं में भोजन की समस्या को दूर कर सकती है।
  • इनके अलावा कोई भी ऐसी तकनीक जिसका उपयोग भविष्य में लम्बी दुरी की अंतरिक्ष यात्राओं को सफल बनाने के लिए किया जायेगा, उन्हें विकसित करने में अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन का एक बहुत बड़ा योगदान होगा।

 

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लाभ (Benefits of the International Space Station)

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए विकसित की गयी तकनीकों का प्रयोग करके पृथ्वी पर भी कई समस्याओं को सुलझाने में बहुत मदद मिली है, इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं :-

 

  • इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के प्रेशराइज केबिन में हवा को लगातार साफ़ किया जाता है और हवा में उपस्थित अनुपयोगी गैसों को अलग किया जाता है, जिससे वहाँ की हवा साँस लेने लायक बनी रहे। इस तकनीक उपयोग करके पृथ्वी पर भी इंडोर एयर क्वालिटी में सुधार किया जाता है।
  • इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में एस्ट्रोनॉट्स के उपयोग के लिए सिमित मात्रा में ही पानी उपलब्ध होता है, इसलिए वहां हर तरह के जल को पुनः रिसाइकल करके पिने लायक बनाया जाता है। इस तकनीक का उपयोग पृथ्वी पर भी जल को रिसाइकल करने में किया जाता है।
  • इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से धरती पर होने वाली प्राकृतिक आपदाओं और मौसम पर नजर रखी जाती है।
  • यहाँ पर विकसित तकनीक का उपयोग करके उन्नत वैक्सीन्स बनाई जा रहीं है।
  • इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए विकसित की गयी तकनीक का उपयोग करके ऐसे रोबोटिक आर्म बनाये जा रहें है, जिनका उपयोग करके कोई डॉक्टर किसी दूसरे देश में बैठकर भी बड़ी आसानी शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) कर सकते है।
  • पृथ्वी से दूर अंतरिक्ष स्टेशन के शून्य गुरुतवाकर्षण वाले वातावरण में रहने के कारण वहां एस्ट्रोनॉट्स की हड्डियाँ कमजोर हो जाती है, उनकी हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है। वहां पर किये गए हड्डियों पर शोध के कारण पृथ्वी पर ऑस्टिओपोरोसिस के उपचार में बहुत मदद मिली है।
  • अंतरिक्ष स्टेशन पर की गयी रिसर्च का उपयोग करके कई उन्नत मेडिकल उपकरण बनाये गए है।

 

अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के रोचक तथ्य (Interesting facts about the International Space Station)

  • इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में गुत्वाकर्षण पृथ्वी की सतह की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत होता है, लेकिन पृथ्वी की कक्षा में वस्तुएँ लगातार गिरती हुई अवस्था में होती है। जिसके कारण इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में भारहीनता का अनुभव होता है।
  • इस स्पेस स्टेशन पर कार्य करने वाले क्रू मेंबर प्रतिदिन 16 सूर्योदय और 16 सूर्यास्त देख सकते है।
  • अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री पैगी विहिटसन ने अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय तक रहने का रेकॉर्ड बनाया है, इन्होने लगातार 665 दिन 22 घंटे और 22 मिनट का समय अंतरिक्ष में बिताया है।
  • इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को पृथ्वी से बिना किसी उपकरण के भी देखा जा सकता है,  चाँद के बाद यह पृथ्वी से दिखाई देने वाली दूसरी सबसे चमकदार वस्तु है।
  • इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर एक जिम भी बनाया गया है यहां प्रत्येक एस्ट्रोनॉट को प्रतिदिन  घंटे वर्कआउट करना आवश्यक होता है, अन्यथा शून्य ग्रेविटी में उनकी हड्डियाँ कमजोर जाती है।
  • इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक अंतरिक्ष यात्रियों तक एक पौंड वजन का सामान भेजने में 9100 डॉलर का खर्च आता है।

 

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