श्री महालक्ष्मी मंदिर मुंबई की विस्तृत जानकारी

श्री महालक्ष्मी मंदिर मुंबई की विस्तृत जानकारी 

श्री महालक्ष्मी मंदिर मुंबई का परिचय 

मुंबई में स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर भारत का एक अत्यंत प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है, यह मंदिर मुंबई के मालाबार हिल के उत्तर में भूलाभाई देसाई रोड पर समुद्र के किनारे स्थित है। यह मंदिर हिन्दू धर्म की तीन सबसे प्रमुख देवियों को समर्पित है, जिन्हे श्री महाकाली (इन्हें शक्ति की देवी माना जाता है), श्री महालक्ष्मी (इन्हें धन की देवी माना जाता है ) और श्री महासरस्वती (इन्हें विद्या की देवी माना जाता है ) के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर के गर्भगृह में तीनो देवियों की मूर्तियाँ एक पंक्ति में स्थित है, यह मूर्तियाँ देखने में अत्यंत सुन्दर प्रतीत होती है, मध्य में श्री महालक्ष्मी की मूर्ति स्थित है, इस मूर्ति में श्री महालक्ष्मी को शेर पर सवार होकर राक्षसराज महिषासुर का वध करते हुए दर्शाया गया है। श्री महालक्ष्मी की मूर्ति के दायीं तरफ श्री महाकाली की मूर्ति स्थित है जबकि बायीं तरफ श्री महासरस्वती की मूर्ति स्थित है। तीनों मूर्तियों को स्वर्ण और मोतियों से बने सुन्दर आभूषणों से सुसज्जित किया गया है। 

 

श्री महालक्ष्मी मंदिर, मुंबई

 

मुंबई में स्थित यह मंदिर हिन्दू आस्था का एक प्रमुख केंद्र है, इसके अलावा यह मंदिर मुंबई के सबसे प्रमुख पर्यटन स्थलों  में से भी एक है, हर साल लाखों की संख्या में भक्त इस मंदिर में देवी के दर्शन करने आते है, इस मंदिर की सुंदरता सभी भक्तों का मन मोह लेती है। भक्तो का ऐसा विश्वास है की इस मंदिर में सच्चे ह्रदय से की गयी विनती को देवी माँ अवश्य सुनती है, इस मंदिर में देवी माँ के दर्शन करने के बाद भक्त असीम शांति का अनुभव करते है। 

 

श्री महालक्ष्मी मंदिर मुंबई की बनावट 

श्री महालक्ष्मी मंदिर, मुंबई नगर के भूलाभाई देसाई रोड पर समुद्र के किनारे स्थित है, इस मंदिर का निर्माण धाकजी दादाजी नाम के एक हिन्दू व्यापारी ने 1831 में करवाया था। श्री महालक्ष्मी मंदिर एक ऊंचे चबूतरे पर स्थित है, यहाँ पहुंचने के लिए विशाल सीढ़ियां बनाई गयी है, मंदिर के सामने बहुत सारी दुकाने स्थित है, जहाँ से देवी को अर्पित करने के लिए प्रसाद और पुष्प आदि ख़रीदे जा सकते है। मंदिर का शिखर कलश लगभग 15 मीटर ऊंचा है, मंदिर के मुख्य द्वार पर पत्थरों से बने दो विशाल दीपमाला स्थम्ब स्थित है, मुख्य द्वार पर ही एक लकड़ी से बना विशाल स्थम्ब है, जिसकी उचाई 10.60 मीटर है, इस स्थम्ब को पूरी तरह चाँदी की चददरो से ढंका गया है। मंदिर के गर्भगृह का वास्तुशिल्प इस प्रकार रखा गया है, की चैत्र और अश्विन नवरात्रों के समय उगते सूर्य की प्रथम किरणें कुछ समय के लिए देवी की प्रतिमाओं पर पड़ती है। 
 
 
 
मंदिर में प्रवेश करने पर सबसे पहले सभामंडप आता है, जिसका आकर लगभग 12.10 मीटर गुना 9.10 मीटर है, सभामंडप के मध्य में एक सिंह की मूर्ति स्थित है, इस सिंह को पूरी तरह चाँदी से मढ़ा गया है, इस सिंह का मुख देवी की प्रतिमाओं की ओर है। सभामंडप के आगे गर्भगृह स्थित है जिसका आकर 11 मीटर गुना 11 मीटर है, गर्भगृह के दोनों तरफ जय और विजय की लकड़ी की मूर्तियां उकेरी गयी है, इन मूर्तियों को चाँदी से मढ़ा गया है, गर्भगृह के बहार गणपति और विट्ठल-रुक्मिणी की छोटी-छोटी मूर्तियां स्थित है। गर्भगृह के मुख्य द्वार पर श्रीयंत्र बना हुआ है जिसे लक्ष्मी यंत्र भी कहा जाता है। गर्भगृह के भीतर तीनों महादेवियो की मूर्तियाँ एक भव्य सिंहासन पर स्थापित है, सिंहासन को चाँदी की सुन्दर नक्काशीदार चददरो से ढाका गया है, जिसमे हाथी और मोर की कलाकृतियाँ उकेरी गयी है, जो देखने में अत्यंत सुन्दर प्रतीत होती है। 
 
 

श्री महालक्ष्मी मंदिर मुंबई के उत्सव 

मार्च-अप्रैल के दौरान आने वाले चैत्र नवरात्र और सितम्बर-अक्टूबर के दौरान आने वाले आश्विन नवरात्रों के समय मंदिर में विशेष उत्सव का आयोजन किया जाता है, इस दौरान पुरे मंदिर को रौशनी और फूलों से सजाया जाता है, मंदिर के आसपास फुटपाथ पर पंडाल लगाए जाते है। नवरात्रों के दौरान बड़ी संख्या में भक्तगण देवी के दर्शनों के लिए आते है, अतः भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर में विशेष व्यवस्था की जाती है, जिससे उन्हें देवी के दर्शनों में कोई दिक्कत न हो, इस दौरान भंडारे का भी आयोजन किया जाता है। 

 

दीपावली का उत्सव भी मंदिर में विशेष धूमधाम से मनाया जाता है, इस दौरान मंदिर में भक्तो की भारी भीड़ रहती है। 

 

कार्तिक पूर्णिमा के दिन  महालक्ष्मी मंदिर में अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया जाता है, इस दिन देवी को 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया जाता है, जिसमे देवी को 56 अलग-अलग तरह की मिठाइयां और खाद्य पदार्थ देवी को अर्पित किये जाते है, फिर उन्हें भक्तों में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। 

दिसम्बर-जनवरी के दौरान आने वाले मार्गशीष मास को भी यहां नवरात्रों की तरह विशेष धूमधाम से मनाया जाता है, यह महीना अत्यंत पवित्र माना जाता है, इस दौरान मंदिर में महिलाएं अधिक संख्या में आती है। 

 

 

चैत्र नवरात्र के पहले दिन, जिसे गुड़ी-पड़वा और हिन्दू नववर्ष का पहला दिन भी कहा जाता है, इस दिन पालकी जुलुस निकला जाता है, इसके अलावा हर साल 17 जून को जिस दिन धवजस्तंब की वर्षगांठ का दिन होता है, इस दिन भी पालकी जुलुस निकला जाता है, पालकी जुलुस के दौरान देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बहुत बड़ी संख्या में भक्त जुलुस में शामिल होते है। 

श्री महालक्ष्मी मंदिर मुंबई का इतिहास 

श्री महालक्ष्मी मंदिर मुंबई का इतिहास अत्यंत रोचक है, बात ब्रिटिश शासन के समय है, उस समय मालाबार हिल और वर्ली को जोड़ने लिए ब्रिटिश इंजीनियरों द्वारा एक दिवार बनाई जा रही थी, इस निर्माण कार्य में सैंकड़ों मजदूर काम कर रहे थे, परन्तु इस निर्माण कार्य -बार बाधाएं आ रही थी, यह दीवार बार-बार बनाये जाने के बाद पुनः गिर जाती थी, जिसके कारण ब्रिटिश इंजिनियर बहुत परेशान और हताश हो चुके थे। 

 

इसी बिच इस कार्य के मुख्य अभियंता रामजी शिवजी को देवी लक्ष्मी ने स्वप्न में दर्शन दिए और उनसे कहा वर्ली में समुद्र के किनारे मेरी एक मूर्ति है, उस मूर्ति को समुद्र से निकलकर समुद्र के किनारे ही उस मूर्ति की स्थापना करो, ऐसा करने से इस निर्माण कार्य की समस्त बाधाएँ दूर हो जायेंगी। स्वप्न से उठकर अगले दिन रामजी शिवजी ने मजदूरों को उस स्थान पर मूर्ति ढूंढ़ने का आदेश दिया, कुछ प्रयास के बाद मजदूर समुद्र से उस मूर्ति को खोज लाने में सफल हो गए, यह देखकर मुख्य अभियंता रामजी शिवजी उस देवी की प्रतिमा के आगे नतमस्तक हो गए। 

 

इसके बाद देवी के आदेशानुसार समुद्र के किनारे एक छोटा सा मंदिर बनाकर उस मूर्ति को स्थापित किया गया। देवी की मूर्ति की स्थापना के बाद मालाबार हिल और वर्ली को जोड़ने लिए बनाई जा रही दिवार का निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के पूरा हो गया, यह देखकर ब्रिटिश इंजीनियर आश्चर्यचकित रह गए और उन्हें भी देवी के चमत्कार पर विश्वास हो गया। इस घटना के बाद मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फ़ैल गयी और हजारो की संख्या में भक्त देवी के दर्शन करने आने लगे। 1831 में धाकजी दादाजी नाम के एक हिन्दू व्यापारी ने इस छोटे से मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और इसे वर्तमान विशाल स्वरूप प्रदान किया। 

 

अन्य महत्वपूर्ण जानकारी 

  • श्री महालक्ष्मी मंदिर मुंबई सुबह 6 बजे से रात्री 10 बजे तक भक्तों के दर्शन के लिए खुला रहता है।
  • मंदिर में तीनों देवियों की असली प्रतिमाएं स्वर्ण मुखौटों से ढकी रहती है, इसलिए भक्त मूल प्रतिमाओ के दर्शन नहीं कर पाते। मूल प्रतिमाओं के दर्शन करने के लिए रात्रि में 9:30 बजे जाना होता है, इस समय केवल 10 से 15 मिनट के लिए मूल प्रतिमाओं से आवरण हटाये जाते है, और प्रतिमाओं भक्तों के दर्शनों के लिए खुला रखा जाता है, जिसके बाद मंदिर बंद हो जाता है।
  • श्री महालक्ष्मी मंदिर मुंबई द्वारा एक ट्रस्ट का संचालन किया जाता है, जिसके द्वारा कई सामाजिक कार्य किये जाते है, इस ट्रस्ट द्वारा गरीब छात्रों को छात्रवती और गरीब रोगियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, इसके अलावा बाढ़, सूखा, महामारी जैसी प्राकृतिक आपदाओं  के समय यह ट्रस्ट लोगो की मदद करता है। 

 

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