मीथेन क्या है, मीथेन के गुण, उपयोग, स्रोत और जानकारी

मीथेन (Methane) के गुण उपयोग और अन्य जानकारी Methane gas information in Hindi

मीथेन क्या है (What is Methane)

मीथेन (Methane) एक रासायनिक यौगिक है, मीथेन पैराफिन श्रृंखला के हाइड्रोकार्बन का सबसे सरल सदस्य तथा सबसे सरल एलकेन (Alkane) होता है। इसका रासायनिक सूत्र CH4 है, अर्ताथ मीथेन का एक अणु कार्बन के एक परमाणु और हाइड्रोजन के 4 परमाणुओं से मिलकर बना होता है।  मीथेन एक अत्यंत ज्वलनशील गैस होती है, यह प्राकृतिक गैस का मुख्य घटक होती है, यह अल्प मात्रा में पृथ्वी के वातावरण में भी पायी जाती है, तथा ग्रीनहाउस गैसों में सबसे शक्तिशाली गैस होती है। 

 

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मीथेन के गुण (Methane Properties)

  • मीथेन एक रंगहीन, गंधहीन और अत्यंत ज्वलनशील गैस होती है। 
  • मीथेन सामान्य हवा से हल्की गैस होती है, इसका घनत्व 0.657 किलोग्राम प्रति घन मीटर होता है। 
  • मीथेन सामान्य तापमान पर गैस अवस्था में पायी जाती है, इसका गलनांक (Melting Point) -182.5 डिग्री सेल्सियस होता है, अर्ताथ -182.5 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर मीथेन ठोस अवस्था में पायी जाती है। मीथेन का क्वथनांक (Boiling Point) -162 डिग्री सेल्सियस होता है, अर्ताथ -162 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर मीथेन तरल अवस्था से गैस अवस्था में परिवर्तित हो जाती है।
  • मीथेन को जलाने पर इससे नीले रंग की फ्लैम निकलती है, जिसका तापमान लगभग 1960 डिग्री सेल्सियस होता है।
  • मीथेन को जलाने पर कार्बन-डाई-क्साइड गैस और पानी बनता है। 
  • मीथेन आमतौर पर स्थिर गैस है, परन्तु हवा में मीथेन की 5 से 15 प्रतिशत मात्रा अत्यंत विस्फोटक होती है। 
  • मीथेन पानी में कुछ मात्रा में घुलनशील होती है। 
  • मीथेन की संरचना चतुष्फलकीय (Tetrahedral) होती है, जिसमें चार हाइड्रोजन के परमाणुओं के मध्य एक कार्बन का परमाणु स्थित होता है, हाइड्रोजन के परमाणु एक दूसरे से 109.5 डिग्री के कोण बनाकर समान दुरी पर  स्थित होते है।
  • मीथेन गैस विषैली नहीं होती है।  

 

मीथेन के उपयोग (Methane Uses)

  • सभी जीवाश्म इंधनो में मीथेन को सबसे कम प्रदुषण करने वाला ईंधन माना जाता है, इसलिए मीथेन का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग ईंधन के रूप में है, मीथेन अत्यंत ज्वलनशील गैस होती है, प्राकृतिक गैस का अधिकांश हिस्सा मीथेन गैस ही होता है, इसलिए आजकल वाहनों, गैस के चूल्हों, वाटर हिटर्स, ओवन में और घर को गर्म रखने में भी मीथेन का उपयोग किया जाता है। 
  • तरल ऑक्सीजन के साथ तरल मीथेन का उपयोग रॉकेटों में ईंधन के रूप में किया जाता है। इसके अलावा आजकल कुछ अंतरिक्ष यान में भी तरल हाइड्रोजन के स्थान पर तरल मीथेन का उपयोग तरल ऑक्सीजन के साथ किया जाने लगा है, क्योकि हाइड्रोजन एक अत्यंत हल्की गैस होती है, तरल अवस्था में भी हाइड्रोजन का घनत्व बहुत कम होता है, अतः पर्याप्त समय तक अंतरिक्ष यान के इंजनों को चलाये रखने के लिए बहुत अधिक मात्रा में हाइड्रोजन गैस की आवश्यकता होती है, जिसे स्टोर करने के लिए बहुत विशाल स्टोरेज टैंक की आवश्यकता होती है, किसी भी अंतरिक्ष यान का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल उसका हाइड्रोजन टैंक ही होता है, मीथेन हाइड्रोजन की तुलना में बहुत भारी गैस होती है, इसलिए हाइड्रोजन की तुलना में उसी मात्रा या वजन की मीथेन को स्टोर करने के लिए हाइड्रोजन की तुलना में बहुत छोटे टैंक की आवश्यकता होती है, जिससे अंतरिक्ष यान का वजन और आकार कम हो जाता है। 
  • मीथेन का उपयोग विधुत उत्पादन में किया जाता है, इसके लिए गैस टरबाइन में मीथेन का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है और टरबाइन के द्वारा विधुत जनरेटर को चलाया जाता है। इसके अलावा मीथेन को जलाकर पानी की वाष्प बनाई जाती है और स्टीम-टरबाइन को चलाया जाता है, जिससे विधुत जेनरेटर को चलकर विधुत बनाई जाती है। 
  • मीथेन के अधूरे दहन से कार्बन-ब्लैक निकलता है, जिसका उपयोग ऑटोमोबाइल उद्योग में टायरों के लिए उपयोग किए जाने वाले रबर में एक प्रबलिंग एजेंट के रूप में किया जाता है।
  • मीथेन का उपयोग हाइड्रोक्लोरिक एसिड, मेथनॉल, क्लोरोफॉर्म और प्लास्टिक के उत्पादन में किया जाता है।   
  • मीथेन का उपयोग अमोनिया गैस के उत्पादन में किया जाता है, जिसका उपयोग उर्वरकों और विस्फोटकों के निर्माण में किया जाता है।  
  • मीथेन का उपयोग हाइड्रोजन उत्पादन के लिए भी किया जाता है, इसके लिए उच्च तापमान वाली वाष्प (जिसका तापमान लगभग 700 से 1100 डिग्री सेल्सियस होता है) और मीथेन की प्रतिक्रिया करवाई जाती है, जिसके परिणामस्वरूप हाइड्रोजन, कार्बन-मोनो-ऑक्साइड और अल्प मात्रा में कार्बन-डाई-ऑक्साइड गैस बनती है।
  • उद्योगों में मीथेन का उपयोग एंटीफ्रीज घटक के रूप में किया जाता है।    

 

मीथेन गैस के स्रोत  (Sources of Methane)

  • मीथेन का सबसे बड़ा स्रोत आर्द्रभूमि या नमी युक्त भूमि (Wetlands) है, पृथ्वी पर उत्पादित होने वाली मीथेन का 30 प्रतिशत से अधिक आर्द्रभूमि द्वारा उत्पन्न किया जाता है, यह मीथेन तालाबों, झीलों, बांधो और नदियों सहित आर्द्रभूमि द्वारा उत्पादित किया जाता है। आर्द्रभूमि में पानी की उपस्थिति और ताज़ी हवा की कमी के कारण आर्द्रभूमि में उपस्थित वनस्पतियाँ और मृत कार्बनिक पदार्थ सड़ने या डिकम्पोज़ होने लगते है, यह अपघटन की प्रक्रिया होती है, जिसके फलस्वरूप बहुत बड़ी मात्रा में मीथेन गैस उत्पन्न होती है। 
  • मीथेन का एक और सबसे महत्वपूर्ण स्रोत दीमक होती है, दीमकों की पाचन प्रक्रिया के दौरान मीथेन गैस बनती है, दीमक सेल्यूलोज खाते है, इसे पचाने के लिए दीमक अपनी आंतो में उपस्थित सूक्ष्मजीवों पर  निर्भर रहते है, ये सूक्ष्मजीव पाचन प्रक्रिया के दौरान मीथेन गैस बनाते है, इस प्रकार प्रत्येक दीमक प्रतिदिन बहुत थोड़ी मात्रा में मीथेन का उत्पादन करता है, धरती पर दीमकों की संख्या बहुत अधिक होती है, इसलिए धरती पर प्राकृतिक रूप से  उत्पन्न होने वाली  कुल मीथेन का लगभग 10 से 12 प्रतिशत दीमकों से उत्पन्न होता है। 
  • महासागर भी मीथेन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, महासागरों में उपस्थित सूक्ष्मजीव बहुत बड़ी मात्रा में मीथेन का उत्पादन करते है, सूक्ष्मजीवों द्वारा उत्पन्न यह मीथेन समुद्र के पानी में मिल जाती है, जो फिर समुद्र की सतह से वायुमंडल में उत्सर्जित हो जाती है। 
  • कोयले के खनन के दौरान बड़ी मात्रा में मीथेन का उत्सर्जन होता है, भूमि में कोयला बनने के दौरान मीथेन गैस भी बनती है, जो कोयले की परतों के बिच में दबी रह जाती है, यह गैस कोयला खंनन के समय बाहर आ जाती है। इसी कारण कोयले की खानों में आग लगने का सबसे बड़ा कारण मीथेन गैस ही होती है।
  • जीवाश्म ईंधन का उत्पादन करते समय भी बड़ी मात्रा में मीथेन का उत्सर्जन होता है, मीथेन गैस प्राकृतिक रूप से पृथ्वी की सतह के नीचे होती है। 
  • ऐसी फसलों की खेती जिनमें अधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है, उनके कारण भी मीथेन का उत्पादन होता है, क्योकि ऐसी फसलों में हमेशा पानी भरा रहता है, जिसके कारण ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और भूमि में मौजूद कार्बनिक पदार्थ डिकम्पोज होने लगते है और इससे बहुत बड़ी मात्रा में मीथेन गैस उत्पन्न होती है।
  • पशुपालन या पशुओं की खेती के कारण भी बहुत बड़ी मात्रा में मीथेन गैस बनती है, पशुओं के अपशिष्ट जब डीकम्पोज़ होते है, तब मीथेन गैस भी बनती है।
  • किसी भी प्रकर के कार्बनिक कचरे के सड़ने या डीकम्पोस होने पर मीथेन गैस का उत्पादन होने लगता है।

 

अन्य जानकारी (Other Information)

  • मीथेन सबसे शक्तिशाली ग्रीन हाउस गैस है, वायुमंडल में गर्मी को रोकने में मीथेन कार्बन-डाई-ऑक्साइड की तुलना में 25 गुना अधिक शक्तिशाली होती है। 
  • मीथेन मानव गतिविधियों के कारण उत्पन्न होने वाली ग्रीन हाउस गैसों में कार्बन-डाई-ऑक्साइड के बाद दूसरी सबसे अधिक मात्रा में उत्पन्न होने वाली ग्रीन हाउस गैस है। 
  • महासागरों में विशेष स्थानों पर कम तापमान और उचित दबाव पर मीथेन और जल के अणु आपस में मिलकर एक क्रिस्टलीय ठोस संरचना बनाते है, जिसे गैस-हाइड्रेट या मीथेन-हाइड्रेट कहा जाता है, यह दिखने में सफ़ेद बर्फ के समान होता है, परन्तु इसमें बहुत बड़ी मात्रा मीथेन गैस होती है। महासागरों की गहराइयों में इसकी परतें कई सौ मीटर मोटी हो सकती है, परन्तु कम गहरे समुद्र और समुद्री तलछट के आसपास यह अधिक स्थिर नहीं होता, क्योकि कम दबाव पर यह वाष्पीकृत होकर गैस में बदल जाता है। गैस-हाइड्रेट को ईंधन का बहुत बड़ा स्रोत माना जाता है, क्योकि एक अनुमान के अनुसार धरती के महासागरों में उपस्थित गैस-हाइड्रेट के भंडारों में उपस्थित ऊर्जा की मात्रा वर्तमान में उपयोग में आ रहे कोयले, गैस और तेल के भंडारों की सम्मिलित ऊर्जा से दोगुनी हो सकती है।

 

 

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